
Jan Sandesh News- Haryana
ग्रीन बेल्ट व हेजिंग अपनाने की मांग, मसानी बैराज प्रदूषण पर भी उठाए सवाल
सरकारी स्कूलों में खाली पदों पर शिक्षा मंत्री के जवाब से असंतोष
चंडीगढ़, 24 फरवरी।
हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के रानियां से विधायक अर्जुन चौटाला ने शून्यकाल और प्रश्नकाल के दौरान जनहित से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाते हुए सरकार को घेरा।
शून्यकाल में अर्जुन चौटाला ने सड़क किनारे खड़े पेड़ों से वाहन टकराने के कारण हो रही दुर्घटनाओं और मौतों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आए दिन वाहन सड़क किनारे लगे पेड़ों से टकरा जाते हैं, जिससे लोगों की जान चली जाती है। समय पर पेड़ों की कटाई और छंटाई नहीं की जाती, जो हादसों का बड़ा कारण बन रही है।
उन्होंने हाल ही में रोहतक जिले के घुसकानी गांव में हुए दर्दनाक हादसे का उल्लेख करते हुए बताया कि एक कार के पेड़ से टकराने से पांच युवकों की मौत हो गई, जिनमें से चार अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। अर्जुन चौटाला ने कहा कि हम विकसित भारत की बात करते हैं, लेकिन विकसित देशों में या तो सड़कों के किनारे पेड़ नहीं लगाए जाते या फिर वहां मजबूत सुरक्षा बैरियर लगाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे यहां सड़कों के किनारे बैरियर लगाना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए सड़क किनारे लगे पेड़ों की जगह ग्रीन बेल्ट और हेजिंग विकसित की जानी चाहिए। हेजिंग होने से दुर्घटना की स्थिति में वाहन की रफ्तार कम होगी और जान-माल का नुकसान नहीं होगा।
अर्जुन चौटाला ने सुझाव दिया कि सड़क किनारे पेड़ों को काटने से होने वाली आय का आधा हिस्सा संबंधित किसानों को दिया जाए और शेष राशि सड़कों के दोनों ओर ग्रीन बेल्ट व हेजिंग विकसित करने में खर्च की जाए। उन्होंने पर्यावरण मंत्री और पीडब्ल्यूडी मंत्री से मिलकर इस संबंध में एक ठोस और व्यावहारिक नीति बनाने की मांग की।
दूसरे अहम मुद्दे पर बोलते हुए अर्जुन चौटाला ने धारूहेड़ा और रेवाड़ी के बीच स्थित मसानी बैराज में छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजस्थान और रेवाड़ी क्षेत्र के उद्योगों का गंदा और रासायनिक युक्त पानी मसानी बैराज में डाला जा रहा है। पहले यह पानी सहाबी नदी में जाता था, लेकिन अब पूरा प्रदूषित पानी बैराज में इकट्ठा हो रहा है।
उन्होंने कहा कि इसके कारण आसपास की उपजाऊ कृषि भूमि बर्बाद हो रही है और क्षेत्र के लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली सरकार यमुना में, पंजाब सरकार घग्गर में और राजस्थान सरकार मसानी बैराज में गंदा पानी छोड़ रही है—तो क्या हरियाणा कोई प्रदेश है या डस्टबिन?
अर्जुन चौटाला ने कहा कि जब राजस्थान और दिल्ली दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है, तो हरियाणा सरकार इन पर दबाव क्यों नहीं बनाती। उन्होंने मांग की कि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों और राजस्थान सरकार पर भारी जुर्माना लगाया जाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह पराली जलाने पर किसानों पर सख्त कार्रवाई की जाती है, उसी तरह औद्योगिक प्रदूषण फैलाने वालों पर भी कठोर कदम उठाए जाने चाहिए। एक बार जमीन प्रदूषित हो जाए तो उसे उपजाऊ बनने में वर्षों लग जाते हैं।
प्रश्नकाल के दौरान अर्जुन चौटाला ने प्रदेश के सरकारी प्राथमिक, माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों व कॉलेजों में विभिन्न श्रेणियों के खाली पड़े पदों का मुद्दा उठाया। उन्होंने शिक्षा मंत्री से जिलेवार और श्रेणीवार रिक्त पदों का ब्यौरा मांगा और यह भी पूछा कि इन पदों को भरने के लिए सरकार की क्या योजना है तथा तब तक छात्रों की पढ़ाई की क्या व्यवस्था की गई है।
शिक्षा मंत्री द्वारा दिए गए जवाब पर असंतोष जताते हुए अर्जुन चौटाला ने कहा कि प्रस्तुत आंकड़े भ्रमित करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि एक ही जवाब में एक जगह प्रिंसिपल के 574 पद रिक्त बताए गए हैं, जबकि दूसरी जगह पीजीटी अध्यापकों को पदोन्नत कर प्रिंसिपल के पद भरे जाने की बात कही गई है, जो स्पष्ट विरोधाभास दर्शाता है।




