संगरिया के विज्ञान केंद्र, ग्रामोत्थान विद्यापीठ परिसर में आज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), नई दिल्ली के उप महानिदेशक (कृषि प्रसार) का गरिमामय भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। उनके आगमन पर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. अनूप कुमार सहित वैज्ञानिकों व स्टाफ ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।
भ्रमण के दौरान डॉ. राजवीर सिंह ने केंद्र पर संचालित विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी प्रदर्शनों एवं इंस्ट्रक्शनल फार्म का विस्तार से अवलोकन किया। उन्होंने फसल विविधीकरण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती की गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक तकनीकों को खेत तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है। इस अवसर पर उन्होंने केंद्र परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
डॉ. सिंह ने प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, वैज्ञानिक खेती, फलोत्पादन, मशरूम उत्पादन, बकरी पालन, पशुपालन, स्वयं सहायता समूहों तथा कृषक उत्पादक संगठनों (FPO) से जुड़े प्रगतिशील किसानों एवं कृषक महिलाओं से व्यक्तिगत संवाद किया। उन्होंने किसानों की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए उनके कार्यक्षेत्र में आने वाली समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की और समाधानपरक सुझाव भी दिए। कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्रकाशित विभिन्न कृषि साहित्य का कृषक हित में विमोचन किया गया।
अपने संबोधन में डॉ. राजवीर सिंह ने जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि में आ रहे बदलावों और इसके संभावित प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में किसानों को उन्नत तकनीकों, फसल विविधीकरण, प्रभावी जल प्रबंधन एवं जोखिम न्यूनीकरण उपायों को अपनाना अनिवार्य होगा। इस संदर्भ में उन्होंने कहा, “किसान स्वयं में एक बड़ा वैज्ञानिक है,” क्योंकि वह अपने अनुभव और नवाचार के बल पर कठिन परिस्थितियों में भी समाधान खोज लेता है।
उन्होंने वर्ष 2022–23 के रबी मौसम का उदाहरण देते हुए बताया कि पंजाब में अत्यधिक वर्षा के कारण आलू सहित कई फसलों को नुकसान की आशंका थी। सामान्य सलाह जल निकासी की थी, लेकिन एक प्रगतिशील किसान ने खेत के एक कोने में गहरा गड्ढा बनाकर अतिरिक्त पानी उसमें एकत्रित कर लिया, जिससे उसकी फसल सुरक्षित रही। डॉ. सिंह ने इसे किसानों की नवाचार क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
डॉ. राजवीर सिंह ने जानकारी दी कि आगामी वर्षों में राष्ट्रीय कपास मिशन के अंतर्गत ऐसी उन्नत कपास किस्मों का विकास किया जा रहा है, जिनकी चुनाई एक ही बार में संभव होगी। इससे श्रम लागत में कमी आएगी और उत्पादन दक्षता में वृद्धि होगी। इसके साथ ही उन्होंने कार्बन क्रेडिट पर चर्चा करते हुए बताया कि जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियाँ अपनाने वाले किसानों को भविष्य में आर्थिक लाभ प्रदान किया जाएगा।
उन्होंने क्षमता निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि समय-समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करना किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाता है। कार्यक्रम में आसपास के क्षेत्रों से लगभग 40 किसानों एवं कृषक महिलाओं ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. राजवीर सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों एवं समस्त स्टाफ के साथ बैठक कर केंद्र की भावी कार्ययोजनाओं पर चर्चा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके पश्चात वे श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय कृषि मेले में भाग लेने के लिए रवाना हुए।
यह भ्रमण कार्यक्रम क्षेत्र के किसानों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक बल्कि अत्यंत प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।








