



पटना/नई दिल्ली। बिहार के एक छोटे कस्बे से निकलकर देश-विदेश में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन अरुणाभ सिन्हा ने यह कर दिखाया है। उनकी कहानी संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की एक प्रेरणादायक मिसाल है।
आर्थिक तंगी के दौर में अरुणाभ की मां ने बेटे की पढ़ाई के लिए अपने सोने के कंगन तक बेच दिए। इसी त्याग और समर्थन के बल पर अरुणाभ ने IIT बॉम्बे से मेटलर्जी और मैटेरियल साइंस में पढ़ाई पूरी की।
पढ़ाई के बाद उन्होंने पहला स्टार्टअप शुरू किया, जो सफल नहीं हो सका। हालांकि, असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम करते हुए उन्होंने लॉन्ड्री सर्विस से जुड़ी एक बड़ी समस्या को पहचाना। इसी अनुभव से जन्म हुआ UClean का।
UClean का 24–48 घंटे में कपड़े धोकर डिलीवरी देने वाला मॉडल तेजी से लोकप्रिय हुआ। आज यह स्टार्टअप करीब ₹160 करोड़ के सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है और भारत समेत कई देशों में 800 से अधिक आउटलेट्स के साथ अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुका है।
अरुणाभ सिन्हा की यह यात्रा साबित करती है कि सही सोच, निरंतर प्रयास और परिवार के भरोसे से असफलता भी सफलता की सीढ़ी बन सकती है। उनकी कहानी आज के युवाओं और स्टार्टअप जगत के लिए एक सशक्त प्रेरणा है।
— जन संदेश न्यूज़




