#सोशल मीडिया पर एक Gen Z कर्मचारी का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने कॉर्पोरेट सेक्टर में वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। वीडियो में युवा कर्मचारियों की निजी ज़िंदगी और प्रोफेशनल दबाव के बीच बढ़ते टकराव को उजागर किया गया है।

#वायरल वीडियो में सिमरन नाम की एक Gen Z एम्प्लॉयी ने बताया कि उसने अपने मैनेजर को हफ्तों पहले ही अपने ट्रैवल प्लान की पूरी जानकारी दे दी थी। उस दौरान किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं जताई गई। लेकिन जब वह एयरपोर्ट पहुंचकर अपनी फ्लाइट लेने की तैयारी कर रही थी, तभी अचानक उसे मैसेज मिला कि अर्जेंट डिप्लॉयमेंट के चलते उसकी छुट्टी कैंसिल कर दी गई है।
सिमरन ने वीडियो में कहा कि काम पर इमरजेंसी हो सकती है, लेकिन बार-बार कर्मचारियों की पर्सनल कमिटमेंट्स को नजरअंदाज करना सही नहीं है। उसने कहा कि वह अपनी ज़िंदगी और ट्रैवल एंजॉय करने के लिए काम करती है, न कि हर लास्ट-मिनट डिमांड पर उपलब्ध रहने के लिए।
इस घटना को सिमरन ने मैनेजमेंट की ओर से कम्युनिकेशन की कमी और कर्मचारियों के पर्सनल टाइम के प्रति सम्मान की कमी बताया। उसने सवाल उठाया कि जब ट्रैवल प्लान पहले ही साझा किया जा चुका था, तो आखिरी समय में ऐसा फैसला क्यों लिया गया।
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। बड़ी संख्या में यूजर्स ने सिमरन का समर्थन करते हुए कहा कि कर्मचारियों को अपनी बाउंड्री तय करने और निजी जीवन को प्राथमिकता देने का पूरा अधिकार है।
वहीं कुछ यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि क्या छुट्टी आधिकारिक रूप से अप्रूव की गई थी।
एक यूजर ने लिखा कि अगर छुट्टी मंजूर नहीं थी, तो कन्फर्म करना कर्मचारी की जिम्मेदारी होती है। वहीं कई लोगों का कहना था कि अगर लीव रिक्वेस्ट ऑफिशियल सिस्टम में पहले ही डाली गई थी और समय रहते उसे रिजेक्ट नहीं किया गया, तो मैनेजर को पहले से बैक-अप प्लान तैयार करना चाहिए था।
यह मामला कॉर्पोरेट कल्चर में कर्मचारियों के निजी समय, पारदर्शिता और बेहतर प्लानिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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