
चंडीगढ़। हरियाणा के 18 सरकारी विभागों से जुड़े बैंक खातों में लगभग ₹590 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। यह मामला फिलहाल जांचाधीन है और संबंधित एजेंसियां बैंकिंग लेनदेन तथा खातों के मिलान की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह अनियमितता आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, चंडीगढ़ से जुड़े कुछ सरकारी खातों में बैलेंस अंतर के रूप में सामने आई है। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि कुछ खातों में दर्ज राशि और वास्तविक उपलब्ध धनराशि में बड़ा अंतर पाया गया, जिसके बाद विस्तृत जांच शुरू की गई।
इस मामले को लेकर अभय सिंह चौटाला और इंडियन नेशनल लोकदल की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। INLD ने कहा है कि मामला सार्वजनिक धन से जुड़ा हुआ है और इसकी निष्पक्ष, पारदर्शी व समयबद्ध जांच आवश्यक है। पार्टी का कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि अनियमितता केवल बैंकिंग स्तर की चूक है या इसमें प्रशासनिक निगरानी से जुड़ी कोई कमी भी रही है।
अभय सिंह चौटाला ने बयान में कहा कि सरकारी विभागों के खातों में इस तरह की स्थिति सामने आना गंभीर विषय है। उन्होंने मांग की कि जांच पूरी होने के बाद तथ्य सार्वजनिक किए जाएं, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।
वहीं, सरकार और संबंधित विभागों की ओर से कहा गया है कि मामले की जांच प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों के अनुसार, सभी संबंधित खातों का ऑडिट किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। बैंक से जुड़े कुछ कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सूचना भी सामने आई है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
प्रशासन का कहना है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। फिलहाल मामले में किसी भी पक्ष की भूमिका को लेकर आधिकारिक रूप से अंतिम टिप्पणी नहीं की गई है।
यह प्रकरण राज्य में सरकारी वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।




