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स्वस्थ मिट्टी–सुरक्षित खेत–समृद्ध किसान : खेत बचाओ अभियान के तहत किसान गोष्ठी आयोजित

कृषि विज्ञान केंद्र, ग्रामोत्थान विद्यापीठ, संगरिया द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत गांव खराखेड़ा में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 52 किसानों एवं ग्रामीण युवाओं ने भाग लिया। गोष्ठी का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं समन्वित कृषि प्रबंधन तकनीकों के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. अनूप कुमार ने कहा कि मिट्टी की उर्वरता एवं उत्पादकता बनाए रखने के लिए मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन आवश्यक है। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक स्रोतों के समावेशन एवं वैकल्पिक पोषक तत्वों को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही टिकाऊ कृषि एवं किसानों की समृद्धि का आधार है।वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन (INM) पर जानकारी देते हुए जैव उर्वरकों, हरी खाद, गोबर खाद एवं फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि रासायनिक एवं जैविक स्रोतों के समन्वित उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और उत्पादन लागत घटती है

।डॉ. मुकेश कुमार ने पशुपालन एवं पशुओं की वैज्ञानिक देखभाल पर जानकारी देते हुए संतुलित आहार, टीकाकरण एवं रोग प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला।सहायक निदेशक, केंद्रीय समन्वित कीटनाशी प्रबंधन केंद्र (CIPMC), श्रीगंगानगर डॉ. प्रकाश चंद्रा ने समन्वित कीट प्रबंधन (IPM) एवं कीटनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग पर व्याख्यान दिया। उन्होंने अनावश्यक कीटनाशी प्रयोग से पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में भी जानकारी दी।आईपीएल बायोलॉजिकल के प्रतिनिधि श्री अरविन्द कुमार ने जैव उर्वरकों एवं जैविक उत्पादों के उपयोग की उपयोगिता बताई, जबकि कृषि अनुसंधान अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने वैकल्पिक उर्वरकों, सूक्ष्म पोषक तत्वों एवं आधुनिक कृषि तकनीकों पर जानकारी साझा की।कार्यक्रम के दौरान किसानों की विभिन्न समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का वैज्ञानिकों द्वारा समाधान किया गया।

श्री रघुवीर सिंह नैन ने किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं, फसल अवशेष प्रबंधन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण संबंधी उपायों की जानकारी दी।

गोष्ठी के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र की टीम ने ढैंचा की हरी खाद वाले खेतों का भ्रमण कर किसानों से संवाद भी किया।अंत में किसानों से “स्वस्थ मिट्टी–सुरक्षित खेत–समृद्ध किसान” के संकल्प को अपनाने तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के लिए वैज्ञानिक अनुशंसाओं का पालन करने का आह्वान किया गया। किसानों ने अभियान की सराहना करते हुए ऐसी जागरूकता गतिविधियों को ग्रामीण क्षेत्रों में निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता जताई।#KVKSangaria #KhetBachaoAbhiyan #SoilHealth #SustainableAgriculture #GramotthanVidyapeeth #Hanumangarh

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