संघर्ष से सफलता तक: भारतीय क्रिकेटर संजू सैमसन की प्रेरणादायक कहानी

In Jan Ka Josh, Sports Sandesh, खेल
March 02, 2026
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नई दिल्ली।
संघर्ष जीवन का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानता, वही सफलता के शिखर तक पहुँचता है। भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज़ Sanju Samson की कहानी इसी जज़्बे और निरंतर मेहनत की मिसाल है।

संजू सैमसन का जन्म केरल में हुआ, लेकिन उनके क्रिकेट सफर की शुरुआत दिल्ली से हुई। उनके पिता सैमसन विश्वनाथ दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर कार्यरत थे। इसी कारण संजू का बचपन और प्रारंभिक क्रिकेट प्रशिक्षण दिल्ली में ही हुआ। महज़ 6–7 वर्ष की उम्र में उनके पिता उन्हें पहली बार फिरोजशाह कोतला मैदान पर नेट प्रैक्टिस के लिए लेकर गए, जहाँ से क्रिकेट के प्रति उनका रुझान और गहरा हो गया।

दिल्ली में संजू ने कई क्रिकेट ट्रायल दिए, लेकिन उन्हें लगातार असफलता का सामना करना पड़ा। खुद संजू ने एक इंटरव्यू में बताया था कि अभ्यास के दिनों में उनके पिता ही उनकी क्रिकेट किट उठाकर बस स्टैंड तक छोड़ने जाया करते थे। इस दौरान उन्हें और उनके पिता को कई बार तानों का भी सामना करना पड़ा। लोग व्यंग्य करते हुए कहते थे—“देखो, सचिन और उनके पापा जा रहे हैं, ये निकले हैं तेंदुलकर बनने।”

हालाँकि, संजू ने इन बातों को अपने मन पर हावी नहीं होने दिया। जब दिल्ली में चयन नहीं हुआ, तो उनके पिता ने बड़ा फैसला लेते हुए संजू को केरल के तिरुवनंतपुरम भेज दिया। एक ओर संजू अपनी माँ और भाई के साथ केरल में रहने लगे, वहीं पिता दिल्ली में नौकरी करते रहे। बाद में, जब क्रिकेट में प्रगति नहीं दिखी, तो पिता ने वॉलंटरी रिटायरमेंट लेकर पूरा समय बेटे के करियर को समर्पित कर दिया। वे सुबह-शाम संजू को प्रैक्टिस के लिए ले जाते और उनका मनोबल बढ़ाते रहे।

आखिरकार, यह मेहनत रंग लाई। वर्ष 2011 में संजू सैमसन ने केरल की टीम से फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया। 2012 में भी वे केरल टीम का हिस्सा रहे। 2013 में उन्होंने आईपीएल में राजस्थान फ्रेंचाइज़ी की ओर से कदम रखा, जहाँ उनके प्रदर्शन ने क्रिकेट जगत का ध्यान आकर्षित किया।

इसके बाद 2015 में संजू सैमसन ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। तब से उन्होंने अपने खेल और निरंतर प्रदर्शन से प्रशंसकों के बीच एक अलग पहचान बनाई है।

संजू सैमसन की कहानी यह साबित करती है कि यदि व्यक्ति लगातार मेहनत करता रहे और परिवार का साथ मजबूती से मिले, तो कोई भी बाधा लक्ष्य के रास्ते में दीवार नहीं बन सकती। यह कहानी न केवल खिलाड़ियों, बल्कि हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो संघर्ष के दौर से गुजर रहा है।


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