Category: नजरिया
-

लाल किले का कुआं और दफ्न ‘टाइम कैप्सूल’ का रहस्य
इंदिरा की सरकार ने 280 पाउंड के उस टाइम कैप्सूल का नाम कालपात्र रखा था जन संदेश न्यूज नेटवर्क— नजरिया यह संभवत: 1973 का वर्ष था। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी बुलंदी पर थीं। उनके सलाहकारों का परामर्श था कि उन्हें समकालीन इतिहास और पूर्ववर्ती इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारियां एवं दस्तावेज एक ‘टाइम-कैप्सूल’…
-
आज राजनीति का दुर्भाग्य है कि डॉ. लोहिया, चौधरी चरण सिंह, चौधरी देवी लाल और चंद्रशेखर जैसे भद्र पुरुषों का अकाल सा हो गया है
विपक्षी दलों का तालमेल एकता का ताना-बाना ही न रह जाए ‘इंडिया’ ये जोड़ केवलमात्र भाजपा के खिलाफ बस अपने राजनीतिक अस्तित्व बचाने से ज्यादा कुछ भी नहीं दिखता ये जो नया-नया गठबंधन ‘इंडिया’ बना है, इनमें शामिल अधिकांश वही नेता हैं चले हुए कारतूस दिख रहे हैं 2024 बहुत अनोखा साल होगा भारतीय राजनीति…
-

एक नजरिया: क्यों पिछड़ा है मेवात क्षेत्र?
राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के 35 जिले जो एनसीआर में आते हैं, इन जिलों में हरियाणा प्रदेश का मेवात एनसीआर का दूसरा सबसे पिछड़ा हुआ और गरीब जिला है। वर्ष 2019 से 2021 के नेशनल हेल्थ फैमिली सर्वे के मुताबिक, मेवात क्षेत्र की करीब 80 फीसदी आबादी के पास खाना पकाने के लिए एलपीजी…
-

पदयात्रा: जिसने कतरा भर भी साथ दिया हमारा वादा रहा… वक्त आने पर उन्हें दरिया लौटा देंगे..
”कई बार यह जरूरी हो जाता है कि इंसान स्वयं को खोजने के लिए हजारों मील की राह नापने निकल पड़ता है फिर चाहे इसके लिए तन छिले या धूप तपाए। दृढ़ संकल्पी लोग लक्ष्य की प्राप्ति के बिना बीच राह में नहीं रुकते। ” यात्राओं (पदयात्रा/रथयात्रा) को लेकर इतिहास और तजुर्बे तो यही बताते…
-
अतीक को त्याग सूरदास, रसखान, धन्ना भगत को याद कीजिए
हमारे पास ढेरों ऐसे अविश्वसनीय प्रसंग हैं जो प्रेरक भी हैं, प्रामाणिक हैं, मगर उन्हें व्यापक स्तर पर याद करने की फुर्सत न मीडिया के पास है, न ही बुद्धिजीवियों या सियासतदानों के पास। अतीक अहमद के प्रकरण पर एक अनुमान के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट व डिजिटल मीडिया ने लगभग 600 घंटे खर्च किए और…