विश्व की सबसे बड़ी हड़प्पाकालीन साइट राखीगढ़ी में जारी उत्खनन के दौरान एक अहम सफलता हाथ लगी है। टीला नंबर-सात पर करीब एक सप्ताह पहले शुरू हुई खोदाई में कंकाल मिला है, सिर की ओर मिट्टी का बर्तन रखा मिला। यह खोज हड़प्पा सभ्यता के मानव जीवन व परंपराओं पर नई रोशनी डाल सकती है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की उत्खनन शाखा-द्वितीय, ग्रेटर नोएडा द्वारा की जा रही खोदाई में शुरुआत में कंकाल का आंशिक हिस्सा नजर आया, जिसे सावधानीपूर्वक आगे बढ़ाते हुए टांग तक उजागर किया गया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कंकाल पुरुष का है या महिला का।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कंकाल सुरक्षित रूप से निकाल लिया गया तो इसका डीएनए सैंपल लिया जाएगा। इसके लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वैज्ञानिकों को बुलाया जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हड़प्पा कालीन लोग किस क्षेत्र से जुड़े थे और उनकी आनुवंशिक बनावट कैसी थी।
खोदाई के दौरान टीला नंबर-सात पर एक कंकाल मिला है। अगर कंकाल पूरी तरह से सुरक्षित मिला तो इसका डीएनए लेने के लिए वैज्ञानिकों से बातचीत की जाएगी। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगा। खोदाई के दौरान अन्य भी जो कंकाल मिलेंगे उनमें से कुछ को पुरातत्व संस्थान में शिफ्ट करवाने की योजना है। – मनोज सक्सेना, अधीक्षण पुरातत्वविद,भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा दो ग्रेटर नोएडा।
सिर-पैर की दिशा है परंपरा का संकेत
राखीगढ़ी में मिले अधिकांश कंकालों का सिर-पैर की दिशा है परंपरा का संकेत राखीगढ़ी में मिले अधिकांश कंकालों का सिर उत्तर व पैर दक्षिण दिशा की ओर मिला है। सिरहाने मिट्टी के बर्तन रखने की परंपरा भी सामने आई है, जिससे संकेत मिलता है कि तब मृतकों के साथ भोजन रखने की मान्यता प्रचलित थी।
बता दें कि वर्ष 2015-16 में प्रो. वसंत शिंदे के नेतृत्व में हुए उत्खनन में इसी टीले से करीब 60 कंकाल मिले थे। एक के डीएनए विश्लेषण (हैदराबाद और कोरिया में) से यह पुष्टि हुई थी कि ये अवशेष साढ़े चार हजार वर्ष पुराने हैं। यहां जोताई से प्राचीन अवशेषों के नष्ट होने का खतरा बना है।

