
भारतीय रुपया गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया 32 पैसे टूटकर 95.20 प्रति डॉलर तक फिसल गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक दबाव रुपये पर भारी पड़ रहे हैं।
रुपए की कमजोरी से आयात महंगा होने की आशंका है, खासकर कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य तेल और अन्य आयातित वस्तुओं पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव महंगाई पर दिख सकता है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। Reuters के अनुसार, तेल कीमतों में तेजी और विदेशी पूंजी निकासी भी रुपये पर दबाव बढ़ा रही है।
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